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गुलेबकावळि कथ (सन् १९६२या संकिपा)

कलाकारEdit

म्येEdit

  1. अंबा जगदंबा ना आर्तिने आलिंचवा.. एडि ना कन्नय्य - पि. लील
  2. अनुरागपयोनिधि ओ जननी नी पदमेनम्मि ( पद्यं) - घंटसाल
  3. ई आटलिंक सागवु मामुंदु दॊरबाबुलंता बंदीलिकमुंदु - ऎस्. जानकि बृंदं
  4. उन्नदि चॆबुता विंटारा ने नन्नदि औननि अंटारा - बि.वसंत बृंदं
  5. ऒंटरिनै पोयानु इक इंटिकि एमनि पोनु - घंटसाल
  6. ओ मदना सुंदरा ना दोरा नामदि निन्नुगनि पॊंगिनदिरा - पि.सुशील
  7. कलल अललपै तेलॆनु मनसु मल्लॆपूवै ऎगसिपोदुनो चॆलिया - ऎस्.जानकि, घंटसाल
  8. नन्नु दोचुकॊंदुवटे वन्नॆल दॊरसानि कन्नुललो दाचुकुंदु - रचना: सि.नारायण रॆड्डि; म्ये हालामि: घंटसाल, पि.सुशील
  9. माता जगन्माता ओ माता जगन्माता नीकन्ना लोकंलो नाकॆवरु - घंटसाल
  10. सलामालेकुं साहॆबुगारु बले षोकुगा वच्चारा - ऎस्. जानकि, घंटसाल बृंदं
  11. विन्नावा तत्वं गुरुडा कनुगॊन्नावा सत्यम नरुडो नरुडा - बि. गोपालं

सिरपाEdit

स्वया दिसँEdit

पिनेयागु स्वापूEdit